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तेरे सिवा

तेरे सिवा तो कोई मेरा हमसफ़र नहीं
मुझे क्यूँ प्यार है तुझसे, तुझे अगर नहीं

मैं साया बनके तेरे साथ रहा हूँ मगर
शायद मेरे नसीब में तेरी नज़र नहीं

लो इम्तिहान प्यार का मेरा मेरे हुज़ूर
लेकिन किसी से भूल कर करना जिकर नहीं

सुनते हैं प्यार में तो पिघलते हैं दिल जिगर
शायद तुम्हारे पास में दिल और जिगर नहीं

गर छोड़ कर के चल दिए तुमको सफर में हम
पाओगे इस जहान में हम-सा बशर नहीं

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मेरी मधुर कल्पना की उड़ान का गान प्राण तुम हो
मेरे मृदु स्वप्नों की अजान मूर्तिमान प्राण तुम हो
तुम सहगामिनी मेरे जीवन पथ की जगती पर
जो संजो रखा था मैंने एक अरमान प्राण तुम हो

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