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तेरे सिवा

तेरे सिवा तो कोई मेरा हमसफ़र नहीं
मुझे क्यूँ प्यार है तुझसे, तुझे अगर नहीं

मैं साया बनके तेरे साथ रहा हूँ मगर
शायद मेरे नसीब में तेरी नज़र नहीं

लो इम्तिहान प्यार का मेरा मेरे हुज़ूर
लेकिन किसी से भूल कर करना जिकर नहीं

सुनते हैं प्यार में तो पिघलते हैं दिल जिगर
शायद तुम्हारे पास में दिल और जिगर नहीं

गर छोड़ कर के चल दिए तुमको सफर में हम
पाओगे इस जहान में हम-सा बशर नहीं

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मेरी मधुर कल्पना की उड़ान का गान प्राण तुम हो
मेरे मृदु स्वप्नों की अजान मूर्तिमान प्राण तुम हो
तुम सहगामिनी मेरे जीवन पथ की जगती पर
जो संजो रखा था मैंने एक अरमान प्राण तुम हो
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तुम्हारी खातिर

गीत गाता हूँ, मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
मुस्कुराता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
जब भी देखोगे कहीं ,
मुझको पाओगे वहीँ,
मैं ही आकाश के हर तारे में,
झिलमिलाता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
मुझको क्यूँ खोज रहा
तेरे सन्मुख मैं खड़ा
मैं ही तो बाग़ के इन फूलों में
खिलखिलाता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
छिपके धड़कन में तेरी
मैं ही रहता हूँ सदा
प्रेम से तेरे नए गीतों को
गुनगुनाता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
सुन ले वंशी की सदा
कृष्ण कह या के खुदा
मैं ही गीतों के रूप में तेरे
पास आता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
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एक गीत तुम्हारे आने का, एक गीत तुम्हारे जाने का
एक गीत तुम्हारे रोने का , एक गीत तुम्हारे गाने का
एक गीत लिखा है खुशियों का एक गम का गीत लिखा मैंने
एक गीत लिखा है मधुबन का , एक गीत लिखा वीराने का
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जब से देखी

जब से देखी इक झलक तेरी,
गीत मैं तेरे गाने लगा,
जैसे सपना कोई सच होकर
जीवन में मेरे आने लगा
जब से................................
मिलने को व्याकुल है दिल से ,
दिल दिल को पास बुलाने लगा
कुछ इंतज़ार करना होगा
मैं दिल को यूँ समझाने लगा
जब से...........................
मैं प्यासा युग युग का हूँ
युग युग से खोज रहा तुझको
अब गीत तुम्हारे गा गा कर
मैं अपनी प्यास बुझाने लगा
जब से........................
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मेरे गीतों की दुनिया में अनूठा गीत बनकर
मेरे स्वप्नों की दुनिया में अनूठा मीत बनकर
गए तुम, ह्रदय का संगीत बनकर
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मैं भंवरा हूँ.........

मैं भंवरा हूँ डाल-डाल मंडराना मेरी आदत है
मैं निर्मोही कलियों को तडपाना मेरी आदत है
मैं बंजारा गीत रसीले गाना मेरी आदत है
चंचल मन मैं वन में शोर मचाना मेरी आदत है
मैं भंवरा हूँ..........................................
तुम क्या जानो खोज रहा हूँ मैं किस को सूने मधुवन में
खोजना उसे, पा, आगे बढ़ जाना मेरी आदत है
रुक जाऊँगा वहीँ जहाँ कमलिनी मुझे मिल जायेगी
कलि देख कर जिसे ह्रदय की कलि मेरी खिल जायेगी
मैं भंवरा हूँ.............................................
रुक जाऊँगा वहीँ जहाँ देखूँगा अपना प्यार छिपा
दे दूँगा , दुनिया से जो दिल रखा मैंने छिपा-छिपा
बंधन भाता नहीं मुझे, जग के सब बंधन तोड़ तोड़
उड़ जाना , कमल क्रोड़ में जा सो जाना मेरी आदत है
मैं भंवरा हूँ...............................................
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क्या जाने अली कौन कली पर उसका दिल जाए
आवारा मधुकर को जाने कौन रूप भा जाए
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क्या करोगे?

क्या करोगे तुम हमारा गीत सुनकर?
प्यार की अन्तिम निशानी गीत मेरा
एक हकीकत की कहानी गीत मेरा
'गीत जिसमें है छिपा मनमीत मेरा
गीत मेरा ह्रदय का संगीत मेरा
दर्द--गम से सिसकता-सा
तड़पता-सा गीत मेरा
तरसता-सा अश्क बनकर
बरसता सा गीत मेरा
सुन के मेरा गीत
तेरे अश्क भी गर
झर गए तो क्या होगा?
हो रहोगे चुप तुम केवल आह भरकर
क्या करोगे तुम हमारा गीत सुनकर?
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गा ना सकूंगा आज मुझे पल क्षण भर रोने दो
आज व्यथित मन, स्वप्न बीच में टूट गया है
चलते चलते पथ का साथी छूट गया है
पा ना सकूंगा आज मुझे सब कुछ खोने दो
गा ना सकूंगा आज मुझे क्षण भर रोने दो
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भावी

स्वप्न लोक की परी
तुम्हारी छवि
मेरे ह्रदय दर्पण में
भावी हृदयेश्वरी
छिपाए हुए
तुम्हारा कवि
तुम्हें निज अंतर्मन में
अनजान पौध की कली
लगो तुम भली
बिना देखे जीवन में
खोज रहा कली
तुम्हारा अली
तुम्हें हर वन मधुवन में
मिल जाओ मौन
देख मैं कौन
इच्छुक तेरे दर्शन का
निकल के चित्र
प्रकट बन मित्र
तोड़ दे आज
चौखटा इस दर्पण का
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चले आओ चले आओ तुम्हें दिल ने पुकारा है
बहुत रंगीन मौसम है, बड़ा दिलकश नज़ारा है
चलाओ कहीं भी हो मेरी आवाज़ को सुनकर
चले आओ कहीं भी हो कोई भी रास्ता चुनकर
चले आओ मेरा यह गीत ही मेरा इशारा है