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तुम न आए........

तुम आए जाने वाले ,दे के तन्हाई
तुम्हारे याद क्यूँ आई, तुम्हारी याद क्यूँ आई ?


हम भुला बैठे थे अपनी जिंदगी के गुज़रे दिन
रात जब काटी थी हमने बिरहा में तारों को गिन
हाय कैसी चल पड़ी ये आज पुरवाई
तुम्हारी याद क्यूँ आई, तुम्हारी................
तुम आए.................................................


क्यूँ पुराने जख्म ताज़ा होके तड़पाने लगे
प्यार के नगमे सभी ये लोग क्यूँ गाने लगे
इश्क की ये आग किसने फिर से सुलगाई
तुम्हारी याद क्यूँ आई..............................
तुम आए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,



क्यूँ वही अरमां वही फिर फिर ख्वाब क्यूँ आने लगे
दिल के टुकड़े टुकड़े कैसे दिलको धड़काने लगे
फिर वही मौसम वही फिर से घटा छाई
तुम्हारी याद क्यूँ आई...........................
तुम आए.........................................



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कभी तो बहार आएगी इस चमन में
कभी तो घटा छायेगी इस गगन में
कभी तो महक आएगी इस पवन में
कभी चेतना आएगी इस कफ़न में
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एक प्यार के सवाल पर

एक प्यार के सवाल पर, घबरा गए क्यूँ तुम
नज़रें उठा के देखिये शर्मा गए क्यूँ तुम
दांतों में होंठ भींच गए, चेहरा हुआ गुलाल
ऐसा भी क्या सवाल था भरमा गए क्यूँ तुम
एक प्यार के.............................................



लो छोड़ दिया हमने सवालात पूछना
करे तुमको परेशां जो ऐसी बात पूछना
लेकिन है एक सवाल अगर दे सको जवाब
मेरे दिल--दिमाग पर यूँ छा गए क्यूँ तुम
एक प्यार के........................................



पहली नज़र में कर लिया था आपको पसंद
पहले सवाल पर लिखा है आप पर ये छंद
वो हुस्न था शबाब था या सादगी या शर्म
थी कौन सी अदा वो मुझे भा गए क्यूँ तुम
एक प्यार के.....................................
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मेरी मधुर कल्पना की उड़ान का गान प्राण तुम हो
मेरे मृदु सपनों की अजान मूर्तिमान प्राण तुम हो
तुम सहगामिनी मेरे जीवन पथ की जगती पर
जो संजो रखा था मैंने एक अरमान प्राण तुम हो