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अपना घर

अपना घर क्यूँ भूला अपने घर चल रे
छोड़ ये चौका चूल्हा अपने घर चल रे

देश छोड़ परदेस में आया
तूने अपना आप भुलाया
समझ रहा क्यूँ इसको अपना,
छोड़ येरेन बसेरा , अपने घर चल रे  .अपना घर...............

क्या लाया क्या ले जाएगा
सोच  रहा क्यूँ पछतायेगा
छोड़ दे सब सामान यहाँ का
ताज दे सभी बखेड़ा, अपने घर चल रे. अपना घर...............


तेरा अपना तुझे पुकारे
खड़ा हुआ ले प्रेम सुधा रे
अन्धकार सब दूर हो गया
आया नया सवेरा, अपने घर चल रे.अपना घर....................


वहीँ चैन आराम मिलेगा
माया से विश्राम मिलेगा
क्यूँ उससे रूठा है जोगी
उससे मुंह क्यूँ फेरा, अपने घर चल रे. अपना घर..........................


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कहाँ परदेस में आकर मैं अपने देश को भूला
विदेशी वेश पहना और अपने वेश को भूला
यहाँ आया था मैं किस काम से भेजा था किसने क्यूँ
विदेशी जाल में ऐसा फंसा , सन्देश को भूला.
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वही खुदा

सबके नसीब का देगा वही खुदा
दाना गरीब का देगा वही खुदा
तू ऐतबार रख उसके जमाल पर
सबकी बलाएँ  खुद लेगा वही खुदा

माना की वक़्त है गर्दिश में अब तेरा
लेकिन क्या रात का होगा ना सवेरा
ज़ुल्मों को सहन कर तू रब के नाम पर
ज़ालिम को खुद सजा देगा वही खुदा

एक तू ही तो नहीं दुनिया में बदनसीब
लाखों हैं और भी तेरे से भी गरीब
उसके करीब जा दामन पसार कर
दाता है सबका वो देगा वही खुदा

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मेरा जीवन मौत की किश्तें चुकाए जा रहा है
एक ख़ुशी के वास्ते सौ गम उठाये जा रहा है
जानता हूँ टूट कर टुकड़े हुए रिश्ते सभी
फिर भी न जाने क्यूँ उन्हें कैसे निभाये जा रहा है
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निर्लिप्त

मौत से लगता नहीं अब दर मुझे
जिंदगी से प्यार भी मुझको नहीं
दोस्तों से है नहीं वफ़ा की उम्मीद
दुश्मनों से दुश्मनी करता नहीं

अब ना कोई आज मेरे पास है
दूर भी मुझसे नहीं कोई कहीं
अब कभी मुझको हंसी आती नहीं
एक समय से आँख भी रोई नहीं

जागता हूँ होश में या सो गया
बेहोश हूँ या स्वप्न में खोया कहीं
जी रहा हूँ मैं या शव बन कर पड़ा
गा रहा हूँ गीत रूह बनकर कहीं

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आसमान चलता हुआ आया कहाँ से
बाजुओं में आ मेरे गुम हो गया
खोजने जब लग पड़ा मैं आसमान को
देखा मैं ही आसमान खुद हो गया