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पी-पी कि ध्वनि

पी-पी की ध्वनि

प्रज्वलित धरती की तपन और सूखे होंठ
शीतल तीव्र पवन
काली घटाएं
वर्षा का सन्देश
दूधिया बादल से
स्वांति की बूँद
मध्य में ही कहीं
अटकी-भटकी
पपीहा की तड़पन
हर बूँद में स्वांति का दर्शन
झूठा प्रतिबिम्ब
सूखे होंठों की प्यास
प्रतिपल स्वांति के आगमन की आस
मौन खंडहरों में
प्रतिध्वनि की आशा से
की गई ध्वनि
ध्वनि के कहीं तक जाने
और लौट कर आने तक की प्रतीक्षा
उस ध्वनि के
अन्तरिक्ष के खोखले तन में
टूटकर बिखर जाने के बाद
मिली निराशा
रात्रि के गहन अन्धकार में
स्वप्न मंदिर में
अचानक
 एकाकीपन का अंत
माथे की बिंदिया
मांग का सिन्दूर
मधुर मिलन
भोर की प्रथम किरण के साथ ही
मंदिर से निकली ध्वनि प्रतिध्वनि
स्वप्न मंदिर की मूर्ति का
टूट कर बिखर जाना
प्राप्त निराशा
लेकिन उस अस्तित्व की संज्ञा के
बोध का प्रश्न चिन्ह
वही पी पी की ध्वनि
और सूखे होंठ.


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