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प्यार है तुमसे

प्यार है तुमसे कुछ भी चाहिए
यकीं हो तो हमें आजमाइए
एक तुम्हारा दिल हमारी आरजू
बदले में ये दिल मेरा ले जाइए
प्यार है तुमसे ....................
प्यार के दो बोल हमसे बोलिए
और दिल के भेद सारे खोलिए
हम तुम्हारे हैं तुम्हारे साथ हैं
जाने मन अब और शर्माइये
प्यार है तुमसे......................
सब्र की हद हो गई है अब सनम
अब करोगे प्यार हमसे कब सनम
गुमसुमी से बात बन पाएगी
बेधड़क हो आज कुछ फरमाइए
प्यार है तुमसे...........................
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जुबाँ को भी तो दो मौका
कहे कुछ दास्ताँ अपनी
निगाहें हाल सारा ,कह नहीं सकतीं
तड़पने का.

3 टिप्पणियाँ:

vandana ने कहा…

pyar se bharpoor rachna

Babli ने कहा…

बहुत सुंदर भाव और अब्भिव्यक्ति के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना दिल को छू गई! बेहद ख़ूबसूरत और प्यार से भरी हुई आपकी ये रचना काबिले तारीफ है !

ज्योति सिंह ने कहा…

is blog ko padhne ki hamesha ichchha rahi magar khulta hi nahi raha aaj ki koshish safal hui ,itni pyari rachana miss hoti jaa rahi thi .aaj line se ek ke baad ek kai rachana padhi sabhi behad khoobsurat hai .

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