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गीत अचानक बन जाता है

गीत अचानक बन जाता है



गीत अचानक बन जाता है
जब मैं बेसुध हो जाता हूँ
तुम छा जाती हो नयनों में
मैं दुनिया से खो जाता हूँ, गीत अचानक बन जाता है............

लय खुद ही बनती जाती है
जब मैं उसे गाने लगता हूँ
शब्दों के रथ पर चढ़ कर जब
जा पास तेरे आने लगता हूँ,गीत अचानक बन जाता है..........

मन वीणा का स्वर भी आकर
उसमें शामिल हो जाता है,
स्मरण मात्र ही सावन का फिर
भावों को आ धो जाता है ,गीत अचानक बन जाता है..........

टूट गया है स्वप्न मेरा जब ,
होता है आभास मुझे फिर,
कागज़ के पन्नों पर आकर,
याद को पंख लगा जाता है ,गीत अचानक बन जाता है...........


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तेरी आँखों में छिपी तस्वीर हूँ
तेरे हाथों पर लिखी तकदीर हूँ
तेरे सपनों की परी हूँ मान ले
अब तक ना  पहचाना , मगर अब जान ले
तेरे हाथों से बंधी ज़ंजीर हूँ.

5 टिप्पणियाँ:

वन्दना ने कहा…

bahut hi sundar geet likha hai.............badhayi.

निर्मला कपिला ने कहा…

टूट गया है स्वप्न मेरा जब ,
होता है आभास मुझे फिर,
कागज़ के पन्नों पर आकर,
याद को पंख लगा जाता है ,गीत अचानक बन जाता है...........

बहुत ही सुन्दर रचना है बधाई आपको।

अजय कुमार ने कहा…

शानदार रचना , भाव बहुत अच्छे लगे

Babli ने कहा…

आपको और आपके परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामनायें!
बहुत बढ़िया रचना लिखा है आपने!

संजय भास्कर ने कहा…

शानदार रचना , भाव बहुत अच्छे लगे

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