1

वही खुदा

सबके नसीब का देगा वही खुदा
दाना गरीब का देगा वही खुदा
तू ऐतबार रख उसके जमाल पर
सबकी बलाएँ  खुद लेगा वही खुदा

माना की वक़्त है गर्दिश में अब तेरा
लेकिन क्या रात का होगा ना सवेरा
ज़ुल्मों को सहन कर तू रब के नाम पर
ज़ालिम को खुद सजा देगा वही खुदा

एक तू ही तो नहीं दुनिया में बदनसीब
लाखों हैं और भी तेरे से भी गरीब
उसके करीब जा दामन पसार कर
दाता है सबका वो देगा वही खुदा

***********

मेरा जीवन मौत की किश्तें चुकाए जा रहा है
एक ख़ुशी के वास्ते सौ गम उठाये जा रहा है
जानता हूँ टूट कर टुकड़े हुए रिश्ते सभी
फिर भी न जाने क्यूँ उन्हें कैसे निभाये जा रहा है
0

निर्लिप्त

मौत से लगता नहीं अब दर मुझे
जिंदगी से प्यार भी मुझको नहीं
दोस्तों से है नहीं वफ़ा की उम्मीद
दुश्मनों से दुश्मनी करता नहीं

अब ना कोई आज मेरे पास है
दूर भी मुझसे नहीं कोई कहीं
अब कभी मुझको हंसी आती नहीं
एक समय से आँख भी रोई नहीं

जागता हूँ होश में या सो गया
बेहोश हूँ या स्वप्न में खोया कहीं
जी रहा हूँ मैं या शव बन कर पड़ा
गा रहा हूँ गीत रूह बनकर कहीं

******


आसमान चलता हुआ आया कहाँ से
बाजुओं में आ मेरे गुम हो गया
खोजने जब लग पड़ा मैं आसमान को
देखा मैं ही आसमान खुद हो गया
2

काश

काश अगर तुम साथ हमारे होते
जीवन का सफ़र कुछ और हसीं हो जाता
ना सावन में हम आहें भरते होते
ना रह रह कर दिल हाथ से निकला जाता

ना नज़र हमारी तुम्हें खोजती फिरती
ना दीवाना दिल हमें कहीं भटकाता
ना दर्द भरा कोई गीत फूटता दिल से
ना गीत मेरा कोई गाकर मुझे रुलाता

ना रातों में यूँ नींद हमारी उडती
ना जाम पिला कर हमको कोई सुलाता
ना सपनों में यूँ बार बार तुम आते
ना स्वप्न टूट जाने पर मैं पछताता

*************

क्षण दो क्षण भर साथ निभाकर कहाँ खो गए ओ सहगामी
क्षण दो क्षण भर प्रीत निभा कर कहाँ खो गए ओ सहगामी
4

स्वप्न हूँ मैं

स्वप्न हूँ मैं आँखों में तेरी
नींद नहीं आने दूंगा
बहुत दिनों के बाद मिले तुम
तुम्हें ना अब जाने दूंगा

खो जाऊँगा तुमको लेकर मैं
एक अजाने स्वप्नलोक में,
जिस दिशा से तुम आये हो अब,
उस और नहीं जाने दूंगा
स्वप्न हूँ मैं.............

इन्द्रधनुषी रंगों से रंग दूंगा
तेरा संसार सलोना
तोड़ के सब बंधन संग मेरे
आओ तारों के पार चलो ना
ले जाऊँगा उस पार तुम्हें
इस पार नहीं आने दूंगा.
स्वप्न हूँ मैं.............
*****************

ये संसार स्वप्नमय सारा ,
इस दुनिया में कौन हमारा
माया के ये बंधन सारे
कौन किसी के साथ चला रे
किसने किसको यहाँ पुकारा
1

या

यह मधुकर कि गूँज है
या, आह कोई भरता है
यह विधि प्रदत्त उपहार है
या, बेमौत कोई मरता है

यह शिशिर ऋतू का समय है
या सूख गई है डाली
शशि को मेघों ने ढांप लिया
या रजनी मावस की काली

यह बिजली की है चमक दमक
या शोले जलते हैं
यह सावन की बौछार है
या अश्रु झरते हैं

यह पायल की झंकार है
या कंगन फूट रहे हैं
यह क्षणिक विदाई का पल है
या रिश्ते टूट रहे हैं

************

विश्वास नहीं होता मुझको मैं जिंदा हूँ
अहसास मुझे कर लेने दो मैं जिंदा हूँ
6

काफिला घटता गया ज्यों ज्यों सफ़र लम्बा हुआ

काफिला घटता गया
ज्यों ज्यों सफ़र लम्बा हुआ
हम अकेले रह गए
मंजिल पर पहुँच जाने के बाद

एक राही हमसफ़र बन
साथ भी कुछ पल चला
चलते चलते खो गया वाह
राह दिखलाने के बाद

होश खो बैठे थे हम
होश मैं रहते हुए
आज हम हैं होश में
बेहोश हो जाने के बाद

हम तरसते रह गए थे
जिंदगी को जिंदगी में
जिंदगी हमको मिली है
आज मर जाने के बाद

तोड़ दी थीं हमने लड़ियाँ
मोतियों की जोश में
आज मोती खोजते हैं
हम बिखर जाने के बाद

*************

काल पुष्प मत मिलो धूल में
पवन सुगन्धित बहने दो
आये नहीं अभी शिशिर के क्षण
बसंत ही रहने दो

5

गीत अचानक बन जाता है

गीत अचानक बन जाता है



गीत अचानक बन जाता है
जब मैं बेसुध हो जाता हूँ
तुम छा जाती हो नयनों में
मैं दुनिया से खो जाता हूँ, गीत अचानक बन जाता है............

लय खुद ही बनती जाती है
जब मैं उसे गाने लगता हूँ
शब्दों के रथ पर चढ़ कर जब
जा पास तेरे आने लगता हूँ,गीत अचानक बन जाता है..........

मन वीणा का स्वर भी आकर
उसमें शामिल हो जाता है,
स्मरण मात्र ही सावन का फिर
भावों को आ धो जाता है ,गीत अचानक बन जाता है..........

टूट गया है स्वप्न मेरा जब ,
होता है आभास मुझे फिर,
कागज़ के पन्नों पर आकर,
याद को पंख लगा जाता है ,गीत अचानक बन जाता है...........


**************
तेरी आँखों में छिपी तस्वीर हूँ
तेरे हाथों पर लिखी तकदीर हूँ
तेरे सपनों की परी हूँ मान ले
अब तक ना  पहचाना , मगर अब जान ले
तेरे हाथों से बंधी ज़ंजीर हूँ.

7

सब्र हमसे

सब्र हमसे करा लिया था तब
सब्र अब आपको करना पड़ेगा
ऐसी जल्दी भी क्या मुहोब्बत में
पास एक इम्तहान करना पड़ेगा

पहले कर लूँ यकीं कि है या नहीं
आपको प्यार इस दीवाने से
जैसे जलता रहा है वो अब तक
इश्क कि आग में जलना पड़ेगा

है मज़ा इश्क में तभी सुनिए
आग दोनों तरफ बराबर हो
जलके हो जाए ख़ाक परवाना
शम्मा को आग में गलना पड़ेगा

कैसे पूजा करूँगा मैं उसकी
जो अभी सिर्फ एक पत्थर है
होगी तकलीफ भी मगर उसको
मेरी मूरत में ही ढालना पड़ेगा

**************

पर्वतों से गीत ले, ले वादियों से रागिनी
निर्झर जब गाता चलता है
कल कल छल छल कि मधुर ध्वनि से
पत्थर ह्रदय पिघलता है
0

मुझे पुकारो

छलका दे आँखों से आंसू
भावी,गीत सुना जब कोई
मुझको जानो वह बंजारा
खोज रहा जो तुम्हें स्वप्न में

हर जन्म में हम तुम मिलते रहे
इस जन्म में तुमसे मिल ना सका मैं
तुम्हें खोजता भटक रहा हूँ
मृग मरीचिका में स्वप्नों कि

कहाँ छिपी हो कौन देश में
कौन रूप में कौन वेश में
अब तो बदली से बाहर आओ
शशि मुख अपना दिखलाने को

मेरे प्राण बसे हैं तुममें
देह यहाँ पर तड़प रही है
ओ, अनदेखी, ओ,मन देखी
आज कहीं से मुझे पुकारो

***************


सबने मुस्काते हुए देखा मुझे
एकांत में रोता ना कोई देख पाया
दर्द का मेरे कहाँ, किसको पता
घाव कैसा है कहाँ किसने लगाया
2

थका -थका हूँ सफ़र में कहीं आराम मिले

थका -थका हूँ सफ़र में कहीं आराम मिले
अभी पता है, ना जाने कहाँ मुकाम मिले

एक कोमा ज़रूरी है जब तक
लिखने वाले को एक कलाम मिले

यूँ तो मिलने को मिल चुके लाखों
ठगने वाले मगर तमाम मिले

जिनसे उम्मीद थी नहीं दिल को
वो ही हाथों में हाथ थाम मिले

हमने मांगी थी उनसे आब-ए-हयात
अपने हिस्से में सिर्फ जाम मिले

ये ही हसरत लिए सफ़र को चले
आज शायद सुबह से शाम मिले

गलत पता ना था उनका "स्वप्न" तलाश करी
ना वो वहां थे , ना उनके निशान-ओ-नाम मिले

*******************

मैं इसी जगह पर तुम्हें खोजने आऊंगा
मैं इसी जगह पर गीत विरह के गाऊंगा
मैं इसी जगह पर रो लूँगा तन्हाई में
मैं इसी जगह पर तड़प तड़प मर जाऊँगा