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मेरे ख़्वाबों को..................................

मेरे ख्वाबों को हकीकत में बदलने वाले
मेरे हमराज़ मेरे साथ में चलने वाले

हमसफ़र साथ में चलना ना कहीं खो जाना
मेरे अपने, तू कहीं गैर नहीं हो जाना
प्यार की लौ में मेरे साथ में जलने वाले
मेरे ख़्वाबों को..................................

दूर मंजिल है तो क्या , तू है तेरा साथ तो है
मेरे हाथों में मेरे दोस्त तेरा हाथ तो है
ठोकरें खा के मेरे साथ संभलने वाले
मेरे ख़्वाबों को................................

साथ में तू है अगर मेरे, मुझे क्या गम है
तेरा हमराह हूँ , ये मेरे लिए क्या कम है
मेरे गीतों पे मेरे साथ मचलने वाले
मेरे ख़्वाबों को................................


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एक गीत तुम्हारे आने का, एक गीत तुम्हारे जाने का
एक गीत तुम्हारे रोने का , एक गीत तुम्हारे गाने का
एक गीत लिखा है खुशियों का, एक गम का गीत लिखा मैंने
एक गीत लिखा है मधुबन का , एक गीत लिखा वीराने का

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एक प्यार के सवाल पर

एक प्यार के सवाल पर, घबरा गए क्यूँ तुम
नज़रें उठा के देखिये शर्मा गए क्यूँ तुम
दांतों में होंठ भींच गए, चेहरा हुआ गुलाल
ऐसा भी क्या सवाल था भरमा गए क्यूँ तुम
एक प्यार के.............................................



लो छोड़ दिया हमने सवालात पूछना
करे तुमको परेशां जो ऐसी बात पूछना
लेकिन है एक सवाल अगर दे सको जवाब
मेरे दिल--दिमाग पर यूँ छा गए क्यूँ तुम
एक प्यार के........................................



पहली नज़र में कर लिया था आपको पसंद
पहले सवाल पर लिखा है आप पर ये छंद
वो हुस्न था शबाब था या सादगी या शर्म
थी कौन सी अदा वो मुझे भा गए क्यूँ तुम
एक प्यार के.....................................
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मेरी मधुर कल्पना की उड़ान का गान प्राण तुम हो
मेरे मृदु सपनों की अजान मूर्तिमान प्राण तुम हो
तुम सहगामिनी मेरे जीवन पथ की जगती पर
जो संजो रखा था मैंने एक अरमान प्राण तुम हो
3

प्यार है तुमसे

प्यार है तुमसे कुछ भी चाहिए
यकीं हो तो हमें आजमाइए
एक तुम्हारा दिल हमारी आरजू
बदले में ये दिल मेरा ले जाइए
प्यार है तुमसे ....................
प्यार के दो बोल हमसे बोलिए
और दिल के भेद सारे खोलिए
हम तुम्हारे हैं तुम्हारे साथ हैं
जाने मन अब और शर्माइये
प्यार है तुमसे......................
सब्र की हद हो गई है अब सनम
अब करोगे प्यार हमसे कब सनम
गुमसुमी से बात बन पाएगी
बेधड़क हो आज कुछ फरमाइए
प्यार है तुमसे...........................
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जुबाँ को भी तो दो मौका
कहे कुछ दास्ताँ अपनी
निगाहें हाल सारा ,कह नहीं सकतीं
तड़पने का.
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कोई ख्वाहिश

कोई ख्वाहिश, कोई उम्मीद, कुछ अरमान बाकी है
रहेगा कुछ कुछ बाक़ी, ये जब तक जान बाक़ी है
कोई ख्वाहिश.....................................................

हजारों मिल चुके ,बिछुडे हजारों, मुझ से मिल मिल कर
हजारों की मगर मुझ से अभी, पहचान बाकी है
कोई ख्वाहिश....................................................

कोई नगमा नया फूटेगा , दिल की वादियों में से
कोई तो ख्वाब सच होकर , हमारे सामने होगा
की सूने घर में आना,एक नया मेहमान बाक़ी है
कोई ख्वाहिश .................................................

सदा उसको कहाँ से दूँ , पुकारूँ मैं उसे कैसे
नज़र के सामने मेरे, कभी एक बार वो आए
मैं उसको जानता हूँ ,मुझसे जो अनजान बाकी है
कोई ख्वाहिश................................................
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कल्पना से भी मधुर तुम
और स्वप्न से तुम मधुरतम
तुम सत्य और समक्ष
क्या ये भी स्वप्न है.
0

कुछ रोज़

कुछ रोज़ पिया से जुदा रही
और रहकर के अब जान गई हूँ
दर्द विरह का क्या होता है
नींद आँख से उड़ती है क्यूँ
बेचैनी शब् भर रहती है
करवट बदल-बदल कर व्याकुल
रात को प्रेमी क्यूँ रोता है
क्यूँ आती है याद किसी की
क्यूँ भाति है अदा किसी की
प्रेम की खातिर पागल प्रेमी
अपना सब कुछ क्यूँ खोता है
अपने पी के पास चलूंगी
अपने पी के के साथ चलूंगी
कोई रोके कोई टोके
होने दो अब जो होता है
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जब चांदनी धरती पे उतरी थी क्षितिज के छोर से
चाँद चुपके चुपके निकला बादलों की कोर से
एकांत में सहसा तुम्हारी याद मुझको गई
शीतल हवा भूला हुआ वह गीत फिर दोहरा गई
2

मैं आ जाऊँगा....

जब तू मुझको याद करेगी
मिलने की फरियाद करेगी
तेरे दिल की पुकार सुनकर रुक ना पाऊंगा
मैं जाऊँगा.........................
जब तू मुझको........................

कभी स्वप्न में मुझे बुलाकर
बात करेगी मुझसे जी भर
कोई बात जब तुझे स्वप्न में ना कह पाऊंगा
मैं जाऊँगा...........................
जब तू मुझको........................

जब सखियों में बैठ अकेली
बात करेगी उनसे मेरी
तब शब्दों का रूप बना ये गीत सुनाऊंगा
मैं जाऊँगा.......................
जब तू मुझको........................


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गज़ब हुआ की तेरे लब पे मेरा नाम आया
सुकून दिल को मिला रूह को आराम आया
लम्हा भर को ही सही याद तो हमको किया
इस बहाने ही सही ये तेरा पैगाम आया
1

मुझे कोई बुला रहा है

मुझे कोई बुला रहा है
स्वप्न जगत में दूर कहीं मैं खोया-खोया सा था
अज्ञात वास से आकर, मुझे जगाकर , कोई सुला रहा है
मुझे कोई बुला रहा है............
वियोग नहीं संयोग नहीं , हास नहीं परिहास नहीं
अंतर्मन में फूट पड़ी हैं किसकी यादें
अश्रु छलकते नहीं हैं फिर भी मुझे कोई रुला रहा है
मुझे कोई बुला रहा है...............
यह स्वर हीन संदेसा मैंने कैसे पाया नहीं जानता
इस झूले पर निज प्रयत्न से झूल रहा हूँ नहीं मानता
जीवन-मृत्यु के झूले पर मुझे कोई झुला रहा है
मुझे कोई बुला रहा है.........................
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गा ना सकूंगा आज मुझे क्षण भर रोने दो
आज व्यथित, स्वप्न बीच में टूट गया है
चलते चलते पथ का साथी छूट गया है
पा ना सकूंगा आज मुझे सब कुछ खोने दो
गा ना सकूंगा आज मुझे क्षण भर रोने दो
1

मुझसे है गर

मुझसे है गर प्यार तुम्हें तो मेरे पास चले आओ
दिल में है इकरार तुम्हें तो, मेरे पास चले आओ
रुक नहीं सकता दीवाना प्यार की सुनकर पुकार
रुक नहीं सकता वो चाहे पथ में हों कांटे हज़ार
रुक नहीं सकता ज़माने के सितम के सामने
जिसको दीवाना बनाया आशिकी के नाम ने
मुझसे है गर प्यार.....................................
एक जन्म क्या सैकडों जन्मों सब्र करना पड़े तो
एक मृत्यु क्या हजारों मौत भी मरना पड़े तो
रोक पाया कौन दो अतृप्त रूहों का मिलन
जिनको दीवाना बनाया प्यार के एक जाम ने
मुझसे है गर प्यार.....................................
रुक नहीं सकती है राधा सुन मोहन की बांसुरी
रुक नहीं सकती हों पग में लाख जंजीरें पड़ीं
कब डराया है उसे प्यार के अंजाम ने
जिसको दीवाना बनाया कृष्ण के पैगाम ने
मुझसे है गर प्यार......................................
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मेरे गीतों की दुनिया में अनूठा गीत बनकर
मेरे स्वप्नों की दुनिया में अनूठा मीत बनकर
गए तुम ह्रदय का संगीत बनकर
0

कुछ तो कर

कुछ तो कर ऐसा खुदाया उनके साथ
डर के वो आ जाएँ मेरी बांहों में
राह भटका दे उन्हें वो भूल से
ख़ुद-ब-ख़ुद आ जाएँ मेरी राहों में

कुछ तो कर..............................

चलते चलते रुक रहे उनके कदम
लग रही है मेहंदी उनके पाँव में
पांवों में उनके ना छले पड़ सकें
आने देना उनको ठंडी छाओं में

कुछ तो कर..........................

उनका पत्थर दिल पिघल जाए खुदा
भर असर ऐसा मेरी भी आहों में
फूल बरसायें बहारें झूमकर
जश्न हो जाए मेरे भी गाँव में

कुछ तो कर.............................


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जाने कौन ज़माना हो कल, जाने कहाँ ठिकाना हो
मिलने को ना तरस जाएँ हम आज ही हमसे मिल जाओ
गर्ज़ नहीं हमसे ग़र कोई बेशक कोई बहाना हो
मतलब तो है मिल जाने से आज ही हमसे मिल जाओ


0

भूल जा

तुझे किसी से प्यार हुआ था भूल जा
आंखों से आंसू मत बरसा
आंखों ने ही उसे छुआ था भूल जा
यही सोच ले स्वप्न एक था टूट गया
एक परदेसी तुझको पथ में लूट गया
उस पथ में मत जा
जिसमें उसका दीदार हुआ था, भूल जा
अब उसकी यादों का निशान मिटा दे तू
अब अपने सपनों को नै जुबान दे तू
मत देख स्वप्न वो
जिस पर वज्र प्रहार हुआ था, भूल जा
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पास आकर भी पास ना सके
हाल--दिल आपको सुना सके
मुस्कुराने की बात क्या कीजे
अश्क पलकों से एक गिरा ना सके