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किसे खोजता हूँ?

किसे खोजता हूँ मैं कबसे भटकता
किसके लिए मेरा दिल है दीवाना
कहाँ खो गई वो कहाँ से बिछुड़ कर
है ये राज़ अब तक जो मैंने ना जाना
वादा किसी से कभी कुछ किया था
अब भी है चाहत उसी से मिलन की
निभाया है हमने तो अपना ये वादा
उसको भी है अपना वादा निभाना
बहुत देर कर दी कहाँ छिप गई वो
प्रतीक्षा में हमने तो बरसों बिताये
मिलेंगे उसी से गँवा कर ये जाँ भी
मिलने ना दे हमको चाहे ज़माना
कभी कल्पना में कभी ख्वाब बनकर
वो आई मेरी जिंदगी में हमेशा
इसी आस पर जी रहा हूँ अभी तक
वो अब आ रही है उसे अब है आना
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कच्चे धागे से बंधे चले आयेंगे हुज़ूर कच्चे धागे से
प्यार के नशे में चले आयेंगे हुज़ूर भागे-भागे से
ये प्यार का बंधन है ना तोड़ सका कोई
इस बहते दरिया को ना मोड़ सका कोई
एक बार प्यार करके ना छोड़ सका कोई
नींद उड़ जायेगी , तब आयेंगे हुज़ूर जागे जागे से
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ना ख्वाहिश

ना ख्वाहिश ना कोई उम्मीद ना अरमान बाकी है
सभी कुछ लुट चुका अपना , फ़क़त अब जान बाकी है
ना मिलने की तमन्ना है मिले क्यूँ कोई आ मुझसे
बचा है क्या हमारे पास क्यूँ पहचान बाकी है
ना ख्वाहिश.................................................
कोई तारा नया किस्मत का टूटेगा ये ज़ाहिर है
नया एक ख्वाब चकनाचूर होकर खाक में होगा
मुहोब्बत के लिए कोई नया बलिदान बाकी है
ना ख्वाहिश................................................
किसको सदा दूँ ? कौन आएगा कहाँ से अब?
मेरे टूटे हुए दिल को यहाँ पर कौन जोडेगा
धड़कते दिल का हो जाना, अभी बेजान बाकी है
ना ख्वाहिश.................................................
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कभी तो बहार आएगी इस चमन में
कभी तो घटा छायेगी इस गगन में
कभी तो महक आएगी इस पवन में
कभी चेतना आएगी इस कफ़न में
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क्यों आते नहीं?

दिल को दिल के पास क्यूँ लाते नहीं?
क्या वजह है आप क्यूँ आते नहीं?
तनहा मैं बैठा तुम्हारी राह मैं
कब से न जाने कर रहा हूँ इंतज़ार
बैठा रहूँ कब तक क्यूँ बतलाते नहीं?
दिल को...........
डर शर्म है या वजह कुछ और है
या हमारे प्यार पर शक है तुम्हें
इम्तिहान ले लो कसम खाते नहीं
दिल को ......................................
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चले आओ चले आओ तुम्हें दिल ने पुकारा है
बहुत रंगीन मौसम है बड़ा दिलकश नज़ारा है
चले आओ कहीं भी हो मेरी आवाज़ को सुनकर
चले आओ कहीं भी हो कोई भी रास्ता चुनकर
चले आओ मेरा ये गीत ही मेरा इशारा है
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तेरे सिवा

तेरे सिवा तो कोई मेरा हमसफ़र नहीं
मुझे क्यूँ प्यार है तुझसे, तुझे अगर नहीं

मैं साया बनके तेरे साथ चल रहा हूँ मगर
शायद मेरे नसीब में तेरी नज़र नहीं

लो इम्तिहान प्यार का मेरा मेरे हुज़ूर
लेकिन किसी से भूल कर करना जिकर नहीं

सुनते हैं प्यार में तो पिघलते हैं दिल जिगर
शायद तुम्हारे पास में दिल और जिगर नहीं

गर छोड़ कर के चल दिए तुमको सफर में हम
पाओगे इस जहान में हम-सा बशर नहीं

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मेरी मधुर कल्पना की उड़ान का गान प्राण तुम हो
मेरे मृदु स्वप्नों की अजान मूर्तिमान प्राण तुम हो
तुम सहगामिनी मेरे जीवन पथ की जगती पर
जो संजो रखा था मैंने एक अरमान प्राण तुम हो
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तुम्हारी खातिर

गीत गाता हूँ, मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
मुस्कुराता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
जब भी देखोगे कहीं ,
मुझको पाओगे वहीँ,
मैं ही आकाश के हर तारे में,
झिलमिलाता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
मुझको क्यूँ खोज रहा
तेरे सन्मुख मैं खड़ा
मैं ही तो बाग़ के इन फूलों में
खिलखिलाता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
छिपके धड़कन में तेरी
मैं ही रहता हूँ सदा
प्रेम से तेरे नए गीतों को
गुनगुनाता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
सुन ले वंशी की सदा
कृष्ण कह या के खुदा
मैं ही गीतों के रूप में तेरे
पास आता हूँ मेरे दोस्त तुम्हारी खातिर
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एक गीत तुम्हारे आने का, एक गीत तुम्हारे जाने का
एक गीत तुम्हारे रोने का , एक गीत तुम्हारे गाने का
एक गीत लिखा है खुशियों का एक गम का गीत लिखा मैंने
एक गीत लिखा है मधुबन का , एक गीत लिखा वीराने का
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मैं भंवरा हूँ.........

मैं भंवरा हूँ डाल-डाल मंडराना मेरी आदत है
मैं निर्मोही कलियों को तडपाना मेरी आदत है
मैं बंजारा गीत रसीले गाना मेरी आदत है
चंचल मन मैं वन में शोर मचाना मेरी आदत है
मैं भंवरा हूँ..........................................
तुम क्या जानो खोज रहा हूँ मैं किस को सूने मधुवन में
खोजना उसे, न पा, आगे बढ़ जाना मेरी आदत है
रुक जाऊँगा वहीँ जहाँ कमलिनी मुझे मिल जायेगी
कलि देख कर जिसे ह्रदय की कलि मेरी खिल जायेगी
मैं भंवरा हूँ.............................................
रुक जाऊँगा वहीँ जहाँ देखूँगा अपना प्यार छिपा
दे दूँगा , दुनिया से जो दिल रखा मैंने छिपा-छिपा
बंधन भाता नहीं मुझे, जग के सब बंधन तोड़ तोड़
उड़ जाना , कमल क्रोड़ में जा सो जाना मेरी आदत है
मैं भंवरा हूँ...............................................
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क्या जाने अली कौन कली पर उसका दिल आ जाए
आवारा मधुकर को जाने कौन रूप भा जाए
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क्या करोगे?

क्या करोगे तुम हमारा गीत सुनकर?
प्यार की अन्तिम निशानी गीत मेरा
एक हकीकत की कहानी गीत मेरा
'गीत जिसमें है छिपा मनमीत मेरा
गीत मेरा ह्रदय का संगीत मेरा
दर्द-ऐ-गम से सिसकता-सा
तड़पता-सा गीत मेरा
तरसता-सा अश्क बनकर
बरसता सा गीत मेरा
सुन के मेरा गीत
तेरे अश्क भी गर
झर गए तो क्या होगा?
हो रहोगे चुप तुम केवल आह भरकर
क्या करोगे तुम हमारा गीत सुनकर?
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गा ना सकूंगा आज मुझे पल क्षण भर रोने दो
आज व्यथित मन, स्वप्न बीच में टूट गया है
चलते चलते पथ का साथी छूट गया है
पा ना सकूंगा आज मुझे सब कुछ खोने दो
गा ना सकूंगा आज मुझे क्षण भर रोने दो
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भावी

ओ स्वप्न लोक की परी
तुम्हारी छवि
मेरे ह्रदय दर्पण में
ओ भावी हृदयेश्वरी
छिपाए हुए
तुम्हारा कवि
तुम्हें निज अंतर्मन में
अनजान पौध की कली
लगो तुम भली
बिना देखे जीवन में
खोज रहा ओ कली
तुम्हारा अली
तुम्हें हर वन मधुवन में
मिल जाओ ओ मौन
देख मैं कौन
इच्छुक तेरे दर्शन का
निकल के आ ओ चित्र
प्रकट बन मित्र
तोड़ दे आज
चौखटा इस दर्पण का
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चले आओ चले आओ तुम्हें दिल ने पुकारा है
बहुत रंगीन मौसम है, बड़ा दिलकश नज़ारा है
चलाओ कहीं भी हो मेरी आवाज़ को सुनकर
चले आओ कहीं भी हो कोई भी रास्ता चुनकर
चले आओ मेरा यह गीत ही मेरा इशारा है
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इतने करीब

इतने करीब आके भी इतने हो दूर क्यूँ
माना हसीं हो हुस्न पर इतना गुरूर क्यूँ


इतना सता के मुझको , क्या मिल जाएगा तुम्हें
सोचो कभी के मैं हूँ इतना गम से चूर क्यूँ

पीता नहीं हूँ फिर भी क्यूँ इतना नशे में हूँ
आंखों का तेरी मुझपे है छाया सुरूर क्यूँ

मेरी खता बताओ क्यूँ मुझसे हो तुम खफा
मैं ही कुसूरवार क्यूँ तुम बेक़सूर क्यूँ?



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ख़ुद-बी-ख़ुद आते हैं वो दिल की पुकार पर
हाथ से थामे हुए दिल-ऐ-बेकरार को
ख़ुद-बखुद गाते हैं वो उल्फत के साज़ पर
आँख से झरते हुए , नगमा-ऐ-प्यार को
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आह भर-भर के

आह भर-भर के तुझे याद किया करता हूँ
तुझसे मिलने की सदा फरियाद किया करता हूँ

तोड़ना दिल को किसी के नहीं अच्छा होता
जाम भर-भर के सदा अश्क पिया करता हूँ

मेरी दुनिया में चले आओ हकीकत बनकर
अपने ख़्वाबों में तुझे आवाज़ दिया करता हूँ

कैसे पायेगी मेरी रूह मेरे बाद सुकून
तुझको पाने की तमन्ना लिए गर मर जाऊं




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तेरे ख़याल को दिल से भुला नहीं सकता
सदायें देके भी तुझको बुला नहीं सकता
वफ़ा की राह में मजबूर इस कदर हूँ मैं
यकीं वफ़ा का भी अपनी दिला नहीं सकता