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क्यों?

आज क्यूँ याद मुझे रह-रह के तेरी आती है
सामने मेरे तेरी तस्वीर -सी खिंच जाती है
एक रस्ते पे कभी हम साथ चले थे लेकिन
याद करके वो समां आँख क्यूँ भर आती है
हो जुदा तुझसे बहुत दूर निकल आया हूँ
बेखबर हूँ ख़ुद से , तुझको ना भुला पाया हूँ
कल से अब तक की इन्हीं यादों में खोया सोचूं
कैसे पल में साड़ी दुनिया क्यूँ बदल जाती है
दर्द सीने में लिए आँख में आंसू भरकर
भूल जाने की तुझे कोशिश जो कभी करता हूँ
और भी ज़्यादा क्यूँ खो जाता हूँ बीते पल में
और ज़्यादा क्यूँ मुझे याद तेरी आती है
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नयन से अश्रु झरे जब
तब ह्रदय से गीत फूटा
लय स्वयं ही बन गई जब
चांदनी में स्वप्न टूटा

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