0

जब से देखी

जब से देखी इक झलक तेरी,
गीत मैं तेरे गाने लगा,
जैसे सपना कोई सच होकर
जीवन में मेरे आने लगा
जब से................................
मिलने को व्याकुल है दिल से ,
दिल दिल को पास बुलाने लगा
कुछ इंतज़ार करना होगा
मैं दिल को यूँ समझाने लगा
जब से...........................
मैं प्यासा युग युग का हूँ
युग युग से खोज रहा तुझको
अब गीत तुम्हारे गा गा कर
मैं अपनी प्यास बुझाने लगा
जब से........................
***************
मेरे गीतों की दुनिया में अनूठा गीत बनकर
मेरे स्वप्नों की दुनिया में अनूठा मीत बनकर
गए तुम, ह्रदय का संगीत बनकर

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

WELCOME